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जुगियाना में 8वीं के बाद शिक्षा पर विराम हाईस्कूल न होने से 1000 परिवारों के बच्चे बीच में छोड़ रहे पढ़ाई 13-14 साल की उम्र में मजदूरी की राह पकड़ रहे किशोर, सबसे ज्यादा प्रभावित लड़कियां

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कानपुर। शहर की जुगियाना बस्ती में शिक्षा का संकट गहराता जा रहा है। यहां रहने वाले करीब एक हजार परिवारों के बच्चों के लिए आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। हाईस्कूल स्तर की पढ़ाई के लिए नजदीक में विद्यालय न होने और आर्थिक तंगी के चलते अधिकांश बच्चे कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने लगते हैं।

बस्ती में केवल आठवीं तक का विद्यालय है। इसके बाद नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों को तीन से चार किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों का रुख करना पड़ता है। मजदूरी और दिहाड़ी पर निर्भर परिवारों के लिए प्रतिदिन बस या ऑटो का किराया वहन करना मुश्किल हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ रहा है, जिन्हें दूर स्थित विद्यालयों में भेजने से परिजन अक्सर हिचकते हैं।

बस्ती के अधिकांश परिवार कचरा बीनने, रिक्शा चलाने और दिहाड़ी मजदूरी जैसे कार्यों से जीवनयापन करते हैं। सीमित आय के कारण परिवारों की प्राथमिकता बच्चों की पढ़ाई के बजाय घर की आर्थिक जरूरतें पूरी करना बन जाती है। 13 से 14 वर्ष की उम्र पहुंचते-पहुंचते कई बच्चे कतरन बीनने, होटलों में काम करने या अन्य मजदूरी में लग जाते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार बस्ती में दसवीं पास युवाओं की संख्या बेहद कम है। बड़े भाई-बहनों द्वारा आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देने का असर छोटे बच्चों पर भी पड़ता है। पढ़े-लिखे युवाओं के अभाव में बच्चों के सामने प्रेरणा का भी संकट बना हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा से जुड़ी कई सरकारी योजनाएं बस्ती तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाईं। निजी विद्यालयों में प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ भी बच्चों को अपेक्षित रूप से नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का इंतजार किया जा रहा है।

क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि बस्ती में नौवीं और दसवीं कक्षाओं की व्यवस्था शुरू की जाए, ताकि बड़ी संख्या में बच्चों का स्कूल छोड़ना रोका जा सके। साथ ही आईटीआई या कौशल विकास केंद्र स्थापित करने, छात्राओं के लिए निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने और अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने की भी जरूरत बताई गई है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में हाईस्कूल की मांग लंबे समय से उठ रही है और इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। ड्रॉपआउट की समस्या को कम करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है। हालांकि बस्ती के लोगों को अब भी इंतजार है कि योजनाएं कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर कब पहुंचेंगी।

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